स्तोत्र
स्तोत्र देवी-देवता की स्तुति का पाठ है। इस संग्रह में छोटे अष्टक, रक्षा-स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम जैसे लंबे पाठ शामिल हैं।
अपने आराध्य के अनुसार पाठ चुनें। पाठ के साथ उसका अर्थ, महत्व और पाठ-विधि पढ़ें। लंबे पाठों में विषय-सूची से सीधे जरूरी भाग पर जा सकते हैं।
हनुमान
- बजरंग बाण
बजरंग बाण हनुमान जी को समर्पित अवधी भाषा की एक उग्र प्रार्थना है — एक आरंभिक दोहा, चौंतीस चौपाइयाँ और एक समापन दोहा — जिसे भक्त गंभीर संकट, भय या बाधा के समय हनुमान जी को शीघ्र सहायता हेतु पुकारने के लिए पढ़ते हैं।
- संकटमोचन हनुमानाष्टक
संकटमोचन हनुमानाष्टक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित आठ छंदों और एक दोहे की स्तुति है, जिसमें हनुमान जी द्वारा दूर किए गए संकटों का स्मरण कर हर छंद के अंत में पूछा जाता है — "को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो"।
सूर्य देव
- आदित्य हृदय स्तोत्र
आदित्य हृदय स्तोत्र वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड का ३१ श्लोकों वाला सूर्य-स्तोत्र है, जिसे अगस्त्य मुनि ने रावण से अंतिम युद्ध से पहले श्रीराम को विजय के लिए सिखाया था।
शिव
- लिङ्गाष्टकम्
लिङ्गाष्टकम् भगवान शिव के लिङ्ग-स्वरूप की स्तुति में आठ श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र है, जिसके हर श्लोक का अंत "तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्" से होता है; अंत में एक फलश्रुति श्लोक है।
- शिव ताण्डव स्तोत्रम्
शिव ताण्डव स्तोत्रम् भगवान शिव के प्रचण्ड ताण्डव-नृत्य और स्वरूप का वर्णन करने वाला संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरा लंकापति रावण की रचना मानती है; प्रचलित पाठ में १५ श्लोक और २ फलश्रुति श्लोक हैं।
श्रीराम
- श्री रामरक्षा स्तोत्र
श्री रामरक्षा स्तोत्र बुधकौशिक ऋषि द्वारा रचित ३८ श्लोकों का संस्कृत रक्षा-कवच है, जिसमें श्रीराम के विभिन्न नामों से शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
विष्णु
- विष्णु सहस्रनाम
विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के एक हज़ार नामों का संस्कृत स्तोत्र है, जो महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया है; इसके १०८ श्लोक भक्त शान्ति, रक्षा और भक्ति के लिए नित्य पढ़ते हैं।