दीपावली (दिवाली)
प्रकाश का पंचदिवसीय पर्व — धनतेरस से भाई दूज तक
दीपावली (दिवाली) की अगली संग्रहित तिथि रविवार, 8 नवंबर 2026 है। नीचे स्थान, परंपरा और स्रोत देखें; स्थानीय समय की पुष्टि करें।
संपादकीय परिचय — अद्यतन: 10 अक्टूबर 2026
इस परिचय में दी गई वर्ष-संबंधी जानकारी उस अद्यतन की है। आगामी तिथि के लिए ऊपर का उत्तर और नीचे की तिथि-सूची देखें।
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है, जब कार्तिक अमावस्या की संध्या में लक्ष्मी-गणेश पूजन होगा। पाँच दिवसीय दीपोत्सव शुक्रवार, 6 नवंबर (धनतेरस) से बुधवार, 11 नवंबर 2026 (भाई दूज) तक चलेगा।
दीपावली (दिवाली) कब है? — तिथियाँ
ये संग्रहित पर्व-तिथियाँ हैं। स्थानीय समय और अलग परंपराओं में अंतर संभव है; नीचे हर तिथि के संदर्भ देखें।
| तिथि (तारीख) | पर्व / तिथि |
|---|---|
रविवार, 8 नवंबर 2026 आगामी स्थान एवं स्रोतनई दिल्ली, भारत उद्धृत कैलेंडर की पर्व-तिथि; स्थानीय परंपरा देखें स्रोत से मिलान: 2026-10-10 | कार्तिक अमावस्या — लक्ष्मी पूजा |
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 स्थान एवं स्रोतनई दिल्ली, भारत उद्धृत कैलेंडर की पर्व-तिथि; स्थानीय परंपरा देखें स्रोत से मिलान: 2026-10-10 | कार्तिक अमावस्या — लक्ष्मी पूजा |
दीपावली (दिवाली) क्यों मनाया जाता है?
दीपावली का अर्थ है "दीपों की पंक्ति"। यह कार्तिक मास की अमावस्या को — वर्ष की सबसे अंधेरी रातों में से एक को — असंख्य दीपों से आलोकित करने का पर्व है, जो अज्ञान पर ज्ञान और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
उत्तर भारत में दीपावली मुख्य रूप से श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास और रावण-विजय के बाद अयोध्या लौटने से जोड़ी जाती है; परंपरा के अनुसार अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी दिन देवी लक्ष्मी की पूजा होती है — मान्यता है कि समुद्र-मंथन से प्रकट हुईं लक्ष्मी इस रात स्वच्छ, प्रकाशित घरों में पधारती हैं। विघ्नहर्ता गणेश की पूजा उनके साथ इसलिए की जाती है कि समृद्धि के साथ बुद्धि और शुभता भी बनी रहे।
पर्व से जुड़ी अन्य कथाएँ भी हैं: नरक चतुर्दशी श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति है, गोवर्धन पूजा श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की, और भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा से जुड़ा है। बंगाल और पूर्वी भारत में इसी रात काली पूजा होती है।
व्यापारी समुदाय के लिए दीपावली नए बही-खाते (चोपड़ा पूजन) का आरंभ है। घरों की सफ़ाई, रंगोली, नए वस्त्र, मिठाइयाँ और परिवार-मिलन इसे भारत का सबसे बड़ा सामाजिक-धार्मिक उत्सव बनाते हैं।
पूजा विधि
1. तैयारी: घर की पूरी सफ़ाई करें, मुख्य द्वार पर तोरण और रंगोली बनाएँ। पूजा का समय स्थानीय पंचांग से देखें — लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में, विशेषकर स्थिर वृषभ लग्न में, श्रेष्ठ मानी जाती है।
2. चौकी स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा में लाल या पीला वस्त्र बिछी चौकी पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें (गणेश जी लक्ष्मी जी के बाईं ओर)। पास में जल से भरा कलश रखें।
3. आचमन, संकल्प और गणेश पूजन: स्वयं पर और पूजा-सामग्री पर जल छिड़ककर शुद्धि करें, संकल्प लें और सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।
4. लक्ष्मी पूजन: लक्ष्मी जी को रोली, अक्षत, कमल या लाल पुष्प, धूप-दीप, खील-बताशे, मिठाई और फल अर्पित करें। चाहें तो कुबेर और बही-खाते/तिजोरी की भी पूजा करें। श्री सूक्त, लक्ष्मी मंत्र या गणेश चालीसा का पाठ करें।
5. आरती और दीपदान: लक्ष्मी जी और गणेश जी की आरती करें, फिर घर के हर कोने, द्वार, आँगन और जल-स्थान के पास दीप जलाएँ। एक दीपक रात भर जलता रहे, ऐसी परंपरा है।
6. प्रसाद: परिवार में प्रसाद बाँटें और बड़ों का आशीर्वाद लें। आतिशबाज़ी करें तो सुरक्षा का ध्यान रखें और स्थानीय नियमों का पालन करें।
परंपराएँ एवं अनुष्ठान
- दिन 1 — धनतेरस (धनत्रयोदशी) — शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 — कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी; धन्वंतरि पूजा, नए बर्तन या धातु की वस्तु की ख़रीद, और संध्या को दक्षिण दिशा में यम-दीप।
- दिन 2 — नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) शनिवार, 7 नवंबर को काली चौदस और हनुमान पूजा बताता है, जबकि नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान रविवार, 8 नवंबर 2026 की भोर में — लक्ष्मी पूजा वाले दिन ही — है।
- दिन 3 — दीपावली, लक्ष्मी पूजा — रविवार, 8 नवंबर 2026 — कार्तिक अमावस्या; नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त सायं 5:54 से 7:50 बजे (प्रदोष काल 5:31 से 8:09 बजे); बंगाल में काली पूजा।
- दिन 4 — गोवर्धन पूजा व अन्नकूट — मंगलवार, 10 नवंबर 2026 — कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा; इस वर्ष अमावस्या 9 नवंबर को दोपहर तक रहने के कारण गोवर्धन पूजा दिवाली के दो दिन बाद है। इसी दिन बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष।
- दिन 5 — भाई दूज (यम द्वितीया) — बुधवार, 11 नवंबर 2026 — कार्तिक शुक्ल द्वितीया; बहनें भाई को तिलक कर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं; चित्रगुप्त पूजा भी इसी दिन।
सामान्य प्रश्न
- दिवाली 2026 कब है?
- दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। पाँच दिवसीय पर्व धनतेरस (शुक्रवार, 6 नवंबर) से आरंभ होकर गोवर्धन पूजा (मंगलवार, 10 नवंबर) और भाई दूज (बुधवार, 11 नवंबर) पर पूर्ण होगा।
- दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
- द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा मुहूर्त सायं 5:54 से 7:50 बजे तक (वृषभ काल) है, जो प्रदोष काल (5:31 से 8:09 बजे) के भीतर है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को लगभग 11:27 बजे आरंभ होकर 9 नवंबर को लगभग 12:31 बजे समाप्त होगी। मुहूर्त सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए अन्य शहरों के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
- 2026 में गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन क्यों नहीं है?
- गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होती है। 2026 में अमावस्या 9 नवंबर को सूर्योदय के बाद दोपहर तक रहती है, इसलिए प्रतिपदा 10 नवंबर के सूर्योदय पर पड़ती है। इसी कारण गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर और भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है। कुछ विदेशी या क्षेत्रीय कैलेंडर अलग तिथि दिखा सकते हैं; हम नई दिल्ली के द्रिक पंचांग का अनुसरण करते हैं।
- दिवाली 2027 कब है?
- दिवाली 2027 शुक्रवार, 29 अक्टूबर को है। उस वर्ष धनतेरस बुधवार, 27 अक्टूबर, नरक चतुर्दशी गुरुवार, 28 अक्टूबर, गोवर्धन पूजा शनिवार, 30 अक्टूबर और भाई दूज रविवार, 31 अक्टूबर 2027 को होगा।
- दिवाली क्यों मनाई जाती है?
- परंपरा के अनुसार दिवाली श्रीराम के रावण-विजय के बाद अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है, जब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। साथ ही यह देवी लक्ष्मी की आराधना की रात है। पाँच दिनों में श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर-वध, गोवर्धन-धारण और यम-यमुना की कथाएँ भी स्मरण की जाती हैं।
- दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
- हर शुभ कार्य गणेश जी के पूजन से आरंभ होता है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। भक्तों की मान्यता है कि लक्ष्मी (समृद्धि) के साथ गणेश (विवेक) की कृपा हो तो धन का सदुपयोग होता है और वह स्थिर रहता है।