लक्ष्मी माता
श्री, कमला और विष्णुप्रिया — परिचय एवं संबंधित पाठ
लक्ष्मी माता हिन्दू परंपरा में श्री, मंगल और समृद्धि की देवी तथा भगवान विष्णु की सहचरी हैं। यहाँ उनका संक्षिप्त परिचय, समुद्र-मंथन की कथा और संबंधित आरती व स्तोत्रों का संपूर्ण पाठ मिलेगा।
लक्ष्मी माता की कथा
लक्ष्मी को श्री और रमा भी कहा जाता है। उनकी उपासना में समृद्धि के साथ मंगल, सद्गुण और जीवन के पालन का भाव जुड़ा है। भक्त उन्हें विष्णु की सहचरी के रूप में स्मरण करते हैं; अलग ग्रंथों और क्षेत्रीय परंपराओं में उनके रूपों तथा प्राकट्य की कथाओं का वर्णन भिन्न हो सकता है।
श्रीमद्भागवत के आठवें स्कंध, आठवें अध्याय में देवताओं और असुरों के समुद्र-मंथन के बीच श्री रमा के प्रकट होने का वर्णन है। कथा में उनकी आभा दिशाओं को प्रकाशित करती है। ऋषि अभिषेक की व्यवस्था करते हैं, गंधर्व मंगलगान करते हैं और दिशाओं के हाथी पूर्ण कलशों से उनका अभिषेक करते हैं। ये प्रसंग उसी पुराण की धार्मिक कथा हैं।
अध्याय के आगे के भाग में लक्ष्मी गुणों का विचार करके मुकुन्द, अर्थात् विष्णु, को चुनती हैं और उनके निकट रहती हैं। यह प्रसंग विष्णु-लक्ष्मी संबंध तथा करुणापूर्ण पालन के भाव को समझने का एक ग्रंथ-संदर्भ है। इसे धन मिलने की कोई निश्चित विधि या आर्थिक परिणाम की गारंटी न समझें।
लक्ष्मी की आरती में उनके मातृरूप, शुभ गुणों और अन्न-वस्त्र जैसे जीवनोपयोगी साधनों का गुणगान होता है। महालक्ष्मी अष्टकम् उनका स्तवन आठ मुख्य श्लोकों में करता है। नीचे उपलब्ध पाठों को उनके अलग-अलग नाम और स्रोतों के साथ पढ़ सकते हैं। दिवाली का पृष्ठ तिथियों, संदर्भ स्थान और घरेलू पूजा के परिचय को अलग से संभालता है।
स्वरूप एवं प्रतीक
भागवत 8.8 के अभिषेक-प्रसंग में लक्ष्मी कमल धारण करती हैं। महालक्ष्मी अष्टकम् में पद्मासन, शंख-चक्र-गदा, गरुड़ और श्वेत वस्त्र का वर्णन मिलता है। अलग पाठों एवं उपासना-परंपराओं के रूप एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं।
अन्य नाम
- श्री
- रमा
- कमला
- महालक्ष्मी
- विष्णुप्रिया
लक्ष्मी माता की आरती, चालीसा, स्तोत्र एवं पर्व
आरती
स्तोत्र
त्योहार
सामान्य प्रश्न
- लक्ष्मी और लक्स्मी क्या अलग देवी हैं?
- लक्ष्मी और रोमन लिपि में Lakshmi या Laxmi उसी देवी के नाम की प्रचलित वर्तनियाँ हैं। पाठ का नाम और आरंभिक पंक्ति देखकर संबंधित स्तुति चुनें।
- लक्ष्मी का समुद्र-मंथन से क्या संबंध है?
- श्रीमद्भागवत 8.8 में समुद्र-मंथन के दौरान श्री रमा के प्रकट होने, अभिषेक और विष्णु को चुनने की कथा मिलती है। यह पुराण की धार्मिक कथा है; अन्य परंपराएँ अलग विवरण रख सकती हैं।