गणेश
विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य
भगवान गणेश शिव-पार्वती के पुत्र और विघ्नहर्ता देवता हैं, जिनकी किसी भी शुभ कार्य, पूजा या नए आरंभ से पहले सबसे पहले वंदना की जाती है। वे बुद्धि, विवेक और मंगल के अधिष्ठाता हैं।
गणेश की कथा
गणेश शिव और पार्वती के पुत्र तथा कार्तिकेय के भाई हैं। उनके जन्म की सबसे प्रसिद्ध कथा शिव पुराण में मिलती है — एक बार स्नान से पहले पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन से एक बालक की आकृति बनाकर उसमें प्राण डाले और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा। जब शिव लौटे, तो उस बालक ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें भी भीतर जाने से रोक दिया। युद्ध में शिव के गणों के पराजित होने के बाद शिव ने उस बालक का सिर काट दिया। पार्वती के शोक और क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने बालक के धड़ पर हाथी का सिर लगाकर उसे पुनर्जीवित किया, उसे अपने गणों का अधिपति — गणपति — बनाया और वर दिया कि हर शुभ कार्य में सबसे पहले उनकी पूजा होगी। विभिन्न पुराणों में यह कथा कुछ भिन्न रूपों में भी मिलती है। गणेश की बुद्धि की एक लोकप्रिय कथा यह है कि जब शिव-पार्वती ने दोनों पुत्रों से कहा कि जो पहले संसार की परिक्रमा करके लौटेगा वही श्रेष्ठ होगा, तो कार्तिकेय अपने मोर पर निकल पड़े, जबकि गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर कहा कि उनके लिए माता-पिता ही संपूर्ण संसार हैं। परंपरा में उन्हें महर्षि व्यास द्वारा बोले गए महाभारत का लेखक भी माना जाता है — इसी प्रसंग से उनके टूटे दाँत की कथा जुड़ी है, यद्यपि विद्वान इसे बाद में जोड़ा गया अंश मानते हैं। गणेश की उपासना का प्रमुख ग्रंथ गणपति अथर्वशीर्ष है, और गणेश पुराण व मुद्गल पुराण उनकी महिमा का विस्तार से वर्णन करते हैं। कुछ परंपराओं में ऋद्धि और सिद्धि उनकी पत्नियाँ तथा शुभ और लाभ उनके पुत्र माने जाते हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का दस दिवसीय उत्सव मनाया जाता है, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी पर मूर्ति-विसर्जन से होता है। हर मास की संकष्टी चतुर्थी और बुधवार भी उनकी पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं।
स्वरूप एवं प्रतीक
हाथी का मस्तक, एक टूटा दाँत (एकदंत), बड़ा उदर, चार भुजाओं में अंकुश, पाश, मोदक और अभय-मुद्रा — वाहन मूषक (चूहा)।
अन्य नाम
- गणपति
- विनायक
- विघ्नहर्ता
- गजानन
- लंबोदर
- एकदंत
- सिद्धिविनायक
- गौरीनंदन
गणेश की आरती, चालीसा, स्तोत्र एवं पर्व
चालीसा
त्योहार
सामान्य प्रश्न
- गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है?
- शिव ने गणेश को गणों का अधिपति बनाकर वर दिया था कि हर शुभ कार्य में सबसे पहले उनकी पूजा होगी। इसलिए वे "प्रथम पूज्य" कहलाते हैं और विघ्न-निवारण के लिए हर आरंभ में उनका स्मरण किया जाता है।
- गणेश जी का सिर हाथी का क्यों है?
- शिव पुराण की कथा के अनुसार द्वार पर रोके जाने पर शिव ने बालक गणेश का सिर काट दिया था, और फिर पार्वती को सांत्वना देने के लिए उन्हें हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया।
- गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?
- गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, जो प्रायः अगस्त–सितंबर में आती है, और यह उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है।
- गणेश जी का वाहन क्या है?
- गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) है, जिसे परंपरा में मन की चंचलता और इच्छाओं पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है।
- गणेश जी को कौन-सा भोग प्रिय है?
- परंपरा में मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोग माना जाता है; लड्डू और दूर्वा घास भी उन्हें विशेष रूप से अर्पित की जाती है।