“जय गणेश जय गणेश देवा” गणेश जी की हिन्दी आरती है। यहाँ उनके स्वरूप, अर्पण और शरणागति का वर्णन करने वाले चयनित आरती संग्रह का पूरा पाठ तथा प्रत्येक पद का सरल अर्थ दिया है।
संपूर्ण पाठ
अर्थ एवं महत्व
यह आरती गणेश के परिचित स्वरूप से शुरू होकर अर्पण और शरणागति की प्रार्थना तक जाती है। यह मराठी “सुखकर्ता दुःखहर्ता” से अलग रचना है। दोनों गणेश जी की स्तुति हैं, पर उनके शब्द और पाठक्रम अलग हैं।
चयनित पाठ संस्कृत डॉक्यूमेंट्स के आरती संग्रह से है। शिकागो विश्वविद्यालय पर उपलब्ध प्रार्थना-संग्रह के पृष्ठ 60 में “फल” के स्थान पर “फूल” तथा अंत में “सूरश्याम” एक साथ मिलता है। यहाँ आरती संग्रह का पाठ रखा गया है और समापन का टेक पूरा दिया है। इन संग्रहों से आधुनिक अनुवाद नहीं लिया गया है।
पाठ विधि
अपनी पूजा-परंपरा में आरती के समय पाठ पढ़ें या गाएँ। दीप की लौ से दूरी रखें और आरती का टेक अपने परिचित गायन-क्रम में दोहरा सकते हैं। यहाँ स्रोत का संपूर्ण पाठ है; दोहराव की मात्रा घर या मंदिर की परंपरा में बदल सकती है।
सामान्य प्रश्न
क्या यह सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती है?
नहीं। यह “जय गणेश जय गणेश देवा” हिन्दी आरती है। “सुखकर्ता दुःखहर्ता” मराठी में अलग आरती है।
गणेश आरती के रचयिता कौन हैं?
चयनित पाठ में “सूर श्याम” आता है, लेकिन तुलना किए गए संग्रह इस शब्द से किसी एक ऐतिहासिक रचयिता की निश्चित पहचान नहीं देते। इसलिए यहाँ निश्चित नाम का दावा नहीं किया गया है।