माँ दुर्गा

महिषासुरमर्दिनी, आदिशक्ति

माँ दुर्गा आदिशक्ति का योद्धा-स्वरूप हैं, जिन्होंने देवताओं की सम्मिलित शक्ति से प्रकट होकर महिषासुर का वध किया। शाक्त परंपरा में वे परम देवी हैं और नवरात्रि में उनके नौ रूपों — नवदुर्गा — की पूजा होती है।

माँ दुर्गा की कथा

"दुर्गा" का अर्थ है जिन तक पहुँचना कठिन हो — अजेय, दुर्ग के समान अभेद्य। उनकी कथा का प्रमुख स्रोत देवी माहात्म्य है, जो मार्कंडेय पुराण का अंश है और दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ के नाम से प्रसिद्ध है — तेरह अध्यायों में सात सौ श्लोक। इसके अनुसार भैंसे के रूप वाला असुर महिषासुर ऐसे वरदान से अहंकारी हो उठा कि कोई पुरुष या देवता उसे न मार सके; उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। तब ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सभी देवताओं के क्रोध से निकले तेज से एक दिव्य नारी प्रकट हुईं। देवताओं ने उन्हें अपने-अपने आयुध दिए — शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र — और हिमवान ने वाहन के रूप में सिंह भेंट किया। देवी ने महिषासुर की सेना का संहार किया और अंत में महिष-रूप में ही उसका वध किया; इसीलिए वे महिषासुरमर्दिनी कहलाती हैं। देवी माहात्म्य के अंतिम भाग में वे शुंभ-निशुंभ नामक असुर भाइयों का अंत करती हैं; इस युद्ध में उनके ललाट से काली प्रकट होती हैं, जो चंड-मुंड का वध कर चामुंडा कहलाती हैं, और रक्तबीज का रक्त पीकर उसका अंत करती हैं। उत्तरकालीन परंपरा में दुर्गा को शिव की पत्नी पार्वती का ही रूप माना जाता है, और बंगाल की दुर्गा पूजा में गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती उनकी संतान के रूप में उनके साथ पूजे जाते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा के नौ स्वरूपों — नवदुर्गा — की क्रम से पूजा होती है, जिनके नाम देवी कवच में ब्रह्मा द्वारा गिनाए गए हैं: १. शैलपुत्री, २. ब्रह्मचारिणी, ३. चंद्रघंटा, ४. कूष्मांडा, ५. स्कंदमाता, ६. कात्यायनी, ७. कालरात्रि, ८. महागौरी और ९. सिद्धिदात्री। दसवें दिन विजयादशमी पर अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव मनाया जाता है। माँ दुर्गा की भक्ति दुर्गा सप्तशती के पाठ, "ॐ दुं दुर्गायै नमः" जैसे मंत्रों, दुर्गा चालीसा और "जय अम्बे गौरी" आरती के माध्यम से की जाती है। भक्त उन्हें संकटों से रक्षा करने वाली करुणामयी माँ के रूप में पूजते हैं।

स्वरूप एवं प्रतीक

सिंह (या बाघ) पर सवार, आठ से अठारह भुजाओं में त्रिशूल, चक्र, शंख, खड्ग, धनुष-बाण, गदा और कमल धारण किए, लाल वस्त्रों में — प्रायः चरणों के पास पराजित महिषासुर के साथ।

अन्य नाम

  • महिषासुरमर्दिनी
  • अम्बे
  • भवानी
  • शेरावाली
  • जगदम्बा
  • चंडी
  • आदिशक्ति

माँ दुर्गा की आरती, चालीसा, स्तोत्र एवं पर्व

आरती

चालीसा

त्योहार

सामान्य प्रश्न

नवदुर्गा के नौ रूप कौन-से हैं?
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — नवरात्रि के नौ दिनों में क्रम से इनकी पूजा होती है।
माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध क्यों किया?
वरदान के अहंकार में महिषासुर ने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था। देवताओं की सम्मिलित शक्ति से प्रकट होकर देवी ने उसका वध किया और धर्म की पुनर्स्थापना की।
दुर्गा सप्तशती क्या है?
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) मार्कंडेय पुराण का अंश है, जिसमें तेरह अध्यायों में सात सौ श्लोक हैं। इसका पाठ विशेष रूप से नवरात्रि में किया जाता है।
"दुर्गा" नाम का अर्थ क्या है?
"दुर्गा" का अर्थ है "जिन तक पहुँचना कठिन हो" — अजेय और अभेद्य। यह शब्द "दुर्ग" (किला) से जुड़ा है।
माँ दुर्गा का वाहन क्या है?
माँ दुर्गा का वाहन सिंह है; कुछ चित्रणों में बाघ भी दिखाया जाता है। इसीलिए उन्हें "शेरावाली" भी कहते हैं।