शिव
महादेव, आदियोगी, नीलकंठ
भगवान शिव हिंदू धर्म के प्रमुख देवता हैं — त्रिमूर्ति में संहार और रूपांतरण के अधिष्ठाता, और शैव परंपरा में स्वयं परब्रह्म। वे महादेव, शंकर, भोलेनाथ और नीलकंठ नामों से पूजित हैं।
शिव की कथा
शिव की जड़ें ऋग्वेद के रुद्र में मिलती हैं — वह उग्र किंतु कल्याणकारी देवता जिनसे रोग-निवारण और रक्षा की प्रार्थना की जाती थी। श्वेताश्वतर उपनिषद रुद्र-शिव को सृष्टि के मूल परमेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित करता है, और आगे चलकर शिव पुराण व लिंग पुराण में उनकी कथाएँ विस्तार से मिलती हैं। त्रिमूर्ति में ब्रह्मा सृष्टि करते हैं, विष्णु पालन करते हैं और शिव संहार करते हैं — पर यह संहार नाश नहीं, बल्कि पुराने का विलय कर नए सृजन का मार्ग खोलना है। शिव की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में समुद्र-मंथन है। जब देवों और असुरों ने अमृत के लिए क्षीरसागर मथा, तो पहले हलाहल विष निकला जो समस्त लोकों को जला सकता था। करुणावश शिव ने वह विष पी लिया और उसे अपने कंठ में रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया — इसी से वे नीलकंठ कहलाए। इसी प्रकार जब राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से उतरीं, तो उनके प्रचंड वेग को पृथ्वी सह न पाती; शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर धीरे-धीरे धरती पर छोड़ा, इसलिए वे गंगाधर हैं। शिव की पहली पत्नी सती, दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं, जिन्होंने पिता के यज्ञ में शिव का अपमान सहन न कर देह त्याग दी। वही सती पुनः हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में जन्मीं और कठोर तप से शिव को पुनः पति रूप में पाया। शिव-पार्वती के पुत्र गणेश और कार्तिकेय हैं, और नंदी उनके वाहन व गणों के प्रमुख हैं। शिव एक ओर कैलास पर ध्यानमग्न आदियोगी हैं, तो दूसरी ओर नटराज रूप में सृष्टि की लय का तांडव नृत्य करने वाले — यही विरोधाभासों का समन्वय उन्हें विशिष्ट बनाता है। शिव की उपासना अधिकतर शिवलिंग के रूप में होती है। द्वादश ज्योतिर्लिंग, सावन मास, सोमवार का व्रत और महाशिवरात्रि उनकी भक्ति के प्रमुख आधार हैं। "ॐ नमः शिवाय" — पंचाक्षर मंत्र — उनका सर्वाधिक जपा जाने वाला मंत्र है।
स्वरूप एवं प्रतीक
जटाओं में गंगा और अर्धचंद्र, ललाट पर तीसरा नेत्र, गले में वासुकि नाग और रुद्राक्ष, शरीर पर भस्म, हाथों में त्रिशूल और डमरू, व्याघ्रचर्म धारण किए — साथ में नंदी बैल। प्रायः शिवलिंग रूप में पूजित।
अन्य नाम
- महादेव
- शंकर
- भोलेनाथ
- नीलकंठ
- रुद्र
- महेश्वर
- पशुपति
- नटराज
शिव की आरती, चालीसा, स्तोत्र एवं पर्व
आरती
चालीसा
स्तोत्र
व्रत कथा
सामान्य प्रश्न
- भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है?
- समुद्र-मंथन के समय निकले हलाहल विष को संसार की रक्षा हेतु शिव ने पी लिया और कंठ में रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया। इसी कारण वे नीलकंठ कहलाते हैं।
- भगवान शिव की पत्नी और पुत्र कौन हैं?
- शिव की पत्नी पार्वती हैं, जो पूर्वजन्म में सती थीं। उनके पुत्र गणेश और कार्तिकेय (स्कंद) हैं।
- शिव की पूजा के लिए कौन-सा दिन श्रेष्ठ माना जाता है?
- परंपरा में सोमवार शिव का दिन माना जाता है। श्रावण (सावन) मास, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि भी शिव-उपासना के विशेष अवसर हैं।
- शिवलिंग क्या है?
- शिवलिंग शिव का निराकार, प्रतीकात्मक स्वरूप है, जिसकी मंदिरों और घरों में जल, दूध और बिल्वपत्र से पूजा की जाती है। बारह ज्योतिर्लिंग इसके सबसे पवित्र तीर्थ माने जाते हैं।
- शिव का मूल मंत्र कौन-सा है?
- "ॐ नमः शिवाय" — पंचाक्षर मंत्र — शिव का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है। महामृत्युंजय मंत्र भी उनकी उपासना में व्यापक रूप से जपा जाता है।