शिव आरती
ॐ जय शिव ओंकारा — शिवजी की आरती (अर्थ सहित)
"ॐ जय शिव ओंकारा" भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जिसमें शिव को ओंकार-स्वरूप मानकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों रूपों की एकता गाई जाती है; अंतिम पंक्ति में रचयिता के रूप में स्वामी शिवानन्द का नाम आता है।
संपूर्ण पाठ
अर्थ एवं महत्व
यह आरती उत्तर भारत में शिव-पूजा, सोमवार के व्रत, सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर लगभग हर घर और मंदिर में गाई जाती है। अंतिम छंद में "कहत शिवानन्द स्वामी" आता है, इसलिए परंपरा इसे स्वामी शिवानन्द की रचना मानती है; उनके बारे में अधिक प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरती की विशेषता यह है कि वह शिव को केवल संहारक नहीं, बल्कि "त्रिगुण स्वामी" के रूप में गाती है — एकानन (विष्णु), चतुरानन (ब्रह्मा) और पंचानन (शिव), उनके वाहन, आभूषण और वस्त्र — और फिर घोषणा करती है कि ये तीनों ओंकार में एक ही हैं, इन्हें अलग मानना अविवेक है। आगे के छंदों में कैलासवासी, भस्मधारी, गंगाधर शिव और काशी विश्वनाथ का वर्णन है। पूजा के अंत में दीप घुमाते हुए, प्रायः शंख-घंटी के साथ, इसे सामूहिक रूप से गाया जाता है।
लाभ
- परंपरागत रूप से शिव-पूजा, रुद्राभिषेक या शिव चालीसा के पाठ के बाद पूजा के समापन पर यह आरती गाई जाती है।
- भक्त मानते हैं कि श्रद्धा से आरती गाने से घर का वातावरण शांत और पवित्र होता है।
- सोमवार, प्रदोष, सावन मास और महाशिवरात्रि पर इसका गायन विशेष रूप से प्रचलित है।
- सरल धुन और दोहराई जाने वाली पंक्ति के कारण पूरा परिवार इसे साथ मिलकर गा सकता है।
पाठ विधि
पूजा के अंत में घी या कपूर का दीप थाली में रखकर शिवलिङ्ग या शिव-चित्र के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए यह आरती गाएँ; साथ में शंख और घंटी बजाई जाती है। हर छंद के बाद "ॐ जय शिव ओंकारा" की टेक दोहराएँ। आरती के बाद दीप की लौ पर हाथ फेरकर आँखों और सिर से लगाएँ और प्रसाद बाँटें।
सामान्य प्रश्न
- "ॐ जय शिव ओंकारा" आरती किसने लिखी?
- आरती के अंतिम छंद में "कहत शिवानन्द स्वामी" आता है, इसलिए परंपरा इसे स्वामी शिवानन्द की रचना मानती है। उनके जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी बहुत कम है।
- शिव आरती में कितने छंद हैं?
- सबसे प्रचलित रूप में टेक सहित बारह छंद हैं — पहला छंद "ॐ जय शिव ओंकारा" टेक है, जो हर छंद के बाद दोहराई जाती है। कुछ पुस्तकों में "लक्ष्मी व सावित्री", "पर्वत सोहैं पार्वती" और "जटा में गंग" वाले छंद नहीं मिलते।
- "ओंकारा" का अर्थ क्या है?
- "ओंकार" पवित्र अक्षर "ॐ" को कहते हैं। आरती शिव को ओंकार-स्वरूप मानती है और कहती है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों ॐ में एक ही हैं।
- शिव आरती कब गानी चाहिए?
- इसे प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा के अंत में गाया जा सकता है। सोमवार, प्रदोष, सावन मास और महाशिवरात्रि पर इसका गायन विशेष रूप से होता है।
- क्या कोई भी शिव आरती गा सकता है?
- हाँ। आरती भक्ति का सरल रूप है और स्त्री, पुरुष, बच्चे — कोई भी श्रद्धा से इसे गा सकता है।