आरती
आरती में दीप अर्पित करते हुए भगवान का गुणगान किया जाता है। यहाँ अलग-अलग देवी-देवताओं की आरतियों का संपूर्ण पाठ और सरल हिन्दी अर्थ मिलेंगे।
जिस देवी या देवता की आरती पढ़नी हो, नीचे उनका नाम चुनें। पाठ के पृष्ठ पर पूजा का संदर्भ और उपलब्ध स्रोत भी दिए गए हैं; घर और मंदिर की परंपराओं में अंतर हो सकता है।
शिव
- शिव आरती
"ॐ जय शिव ओंकारा" भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जिसमें शिव को ओंकार-स्वरूप मानकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों रूपों की एकता गाई जाती है; अंतिम पंक्ति में रचयिता के रूप में स्वामी शिवानन्द का नाम आता है।
माँ दुर्गा
- दुर्गा आरती (जय अम्बे गौरी)
"जय अम्बे गौरी" माँ दुर्गा की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसके तेरह अंतरे देवी के रूप, उनके असुर-संहार और भक्तों पर उनकी कृपा का गुणगान करते हैं; इसे पूजा के अंत में, विशेषकर नवरात्रि में, दीपक घुमाते हुए गाया जाता है।
विष्णु
- ॐ जय जगदीश हरे
"ॐ जय जगदीश हरे" भगवान विष्णु (जगदीश — जगत के स्वामी) की हिन्दी आरती है, जिसकी रचना पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी ने लगभग १८७० में की थी; आज यह लगभग हर पूजा के अंत में गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरती है।