हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की — संपूर्ण पाठ व अर्थ
“आरती कीजै हनुमान लला की” हनुमान जी की स्तुति है, जो उनकी शक्ति, श्रीराम की सेवा और भक्तों की सहायता का स्मरण करती है। यहाँ चयनित आरती संग्रह का पूरा पाठ, टेक और सात पाठ-खंडों के सरल अर्थ हैं।
संपूर्ण पाठ
अर्थ एवं महत्व
आरती में हनुमान की शक्ति का केंद्र श्रीराम की सेवा और भक्तों की रक्षा है। सीता की खोज, लंका-दहन और संजीवनी जैसे प्रसंग उसी सेवा को स्मरण कराते हैं। रोग-दोष और परम पद की पंक्तियाँ भक्तिपरक स्तुति की भाषा हैं, चिकित्सा या निश्चित परिणाम का आश्वासन नहीं।
पाठ संस्कृत डॉक्यूमेंट्स के आरती संग्रह के अनुसार समूहबद्ध है। द्रिक पंचांग में “दे बीरा … लंका जारि”, “लंका सो कोट” और “तोरि जम-कारे” जैसे पाठभेद हैं; यहाँ संग्रह के “दे बीड़ा … लंका जाय”, “लंका सौ कोटि” और “तोड़ि यम कारे” रखे हैं। टेक तथा अंत की पंक्तियाँ पूरी दी गई हैं।
पाठ विधि
अपनी परंपरा में पूजा या हनुमान पाठ के बाद आरती पढ़ें या गाएँ। टेक “आरति कीजै हनुमान लला की” है। दीप का प्रयोग सुरक्षित ढंग से करें। मंगलवार, शनिवार या हनुमान जयंती पर पाठ की परंपराएँ हैं, पर इस पृष्ठ का पाठ किसी एक दिन तक सीमित नहीं है।
सामान्य प्रश्न
- क्या आरती के साथ टेक दोहराना चाहिए?
- चयनित संग्रह में टेक कई पदों के बाद आता है और यहाँ उसे रखा गया है। गायन में परिवार या मंदिर अपनी परिचित लय और दोहराव का अनुसरण कर सकते हैं।
- अहिरावण का प्रसंग क्या सभी रामायणों में है?
- नहीं, रामकथा की अलग परंपराओं में प्रसंग और नाम बदलते हैं। यहाँ अहिरावण उस आरती की पंक्ति के संदर्भ में समझाया गया है; इसे हर रामायण संस्करण का प्रसंग नहीं कहा गया है।