विष्णु
जगत के पालनहार, नारायण
भगवान विष्णु त्रिमूर्ति में जगत के पालनकर्ता हैं और वैष्णव परंपरा में परमेश्वर। धर्म की रक्षा के लिए वे युग-युग में अवतार लेते हैं — जिनमें दस प्रमुख अवतार "दशावतार" कहलाते हैं, जिनमें राम और कृष्ण सर्वाधिक पूजित हैं।
विष्णु की कथा
विष्णु ऋग्वेद में भी उपस्थित हैं, जहाँ उनके "तीन पगों" (त्रिविक्रम) से तीनों लोकों को नाप लेने का वर्णन है। उत्तर-वैदिक काल में वे प्रमुख देवता बने और महाभारत, विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण में नारायण, हरि और वासुदेव के रूप में उनकी महिमा गाई गई। त्रिमूर्ति में ब्रह्मा सृष्टि करते हैं, शिव संहार करते हैं और विष्णु सृष्टि का पालन व संतुलन बनाए रखते हैं। उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी हैं, वाहन गरुड़ हैं, और वे क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में विश्राम करते हैं; उनका धाम वैकुंठ है। भगवद्गीता (४.७–८) में भगवान कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब वे साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए युग-युग में प्रकट होते हैं। यही अवतार-सिद्धांत है। विष्णु के दस प्रमुख अवतार — दशावतार — क्रम से इस प्रकार हैं: १. मत्स्य — मछली रूप, जिन्होंने प्रलय के जल में मनु की नौका को सुरक्षित पार लगाया। २. कूर्म — कछुआ रूप, जिन्होंने समुद्र-मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। ३. वराह — शूकर रूप, जिन्होंने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को प्रलय-सागर से ऊपर उठाया। ४. नरसिंह — आधे नर, आधे सिंह, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु हिरण्यकशिपु का अंत किया। ५. वामन — बौने ब्राह्मण, जिन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि माँगकर तीनों लोक नाप लिए। ६. परशुराम — फरसाधारी ब्राह्मण योद्धा, जिन्होंने अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं का दमन किया। ७. राम — अयोध्या के मर्यादा पुरुषोत्तम राजा, जिन्होंने रावण का वध किया। ८. कृष्ण — देवकी-वसुदेव के पुत्र, गीता के उपदेशक और महाभारत में अर्जुन के सारथी (कुछ परंपराओं में यहाँ बलराम गिने जाते हैं)। ९. बुद्ध — करुणा और अहिंसा के उपदेशक (कुछ सूचियों में इस स्थान पर बलराम या जगन्नाथ आते हैं)। १०. कल्कि — भविष्य के अवतार, जो श्वेत अश्व पर आरूढ़ होकर कलियुग का अंत करेंगे। विष्णु की भक्ति विष्णु सहस्रनाम (महाभारत, अनुशासन पर्व), "ॐ नमो नारायणाय" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्रों, एकादशी व्रत तथा गुरुवार की पूजा के माध्यम से की जाती है। "ॐ जय जगदीश हरे" उनकी सर्वाधिक गाई जाने वाली आरती है।
स्वरूप एवं प्रतीक
श्यामवर्ण, चतुर्भुज — हाथों में सुदर्शन चक्र, पांचजन्य शंख, कौमोदकी गदा और कमल; वक्ष पर श्रीवत्स चिह्न और कौस्तुभ मणि, पीतांबर धारण किए। प्रायः शेषनाग पर शयन करते हुए, चरणों में लक्ष्मी और साथ में गरुड़।
अन्य नाम
- नारायण
- हरि
- जगदीश
- वासुदेव
- अच्युत
- केशव
- पद्मनाभ
- लक्ष्मीपति
विष्णु की आरती, चालीसा, स्तोत्र एवं पर्व
आरती
स्तोत्र
व्रत कथा
त्योहार
सामान्य प्रश्न
- भगवान विष्णु के 10 अवतार कौन-से हैं?
- दशावतार क्रम से हैं — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। कुछ परंपराओं में कृष्ण या बुद्ध के स्थान पर बलराम गिने जाते हैं।
- विष्णु अवतार क्यों लेते हैं?
- भगवद्गीता (४.७–८) के अनुसार जब-जब धर्म की हानि होती है, भगवान सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतार लेते हैं।
- कल्कि अवतार कब होगा?
- पुराणों के अनुसार कल्कि विष्णु का भावी दसवाँ अवतार है, जो कलियुग के अंत में प्रकट होकर अधर्म का नाश करेगा और नए सत्ययुग का आरंभ करेगा।
- भगवान विष्णु की पत्नी और वाहन कौन हैं?
- विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी हैं, उनका वाहन गरुड़ है, और वे क्षीरसागर में शेषनाग पर विश्राम करते हैं। उनका धाम वैकुंठ है।
- विष्णु की पूजा के लिए कौन-सा दिन शुभ है?
- परंपरा में गुरुवार और एकादशी तिथि विष्णु-उपासना के लिए विशेष मानी जाती हैं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है।