एकादशी व्रत कथा

एकादशी की उत्पत्ति की कथा, व्रत विधि, पारण और 2026–2027 की तिथियाँ

एकादशी व्रत कथा की अगली संग्रहित तिथि गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 है। नीचे स्थान, परंपरा और स्रोत देखें; स्थानीय समय की पुष्टि करें।

संपादकीय परिचय — अद्यतन: 10 अक्टूबर 2026

इस परिचय में दी गई वर्ष-संबंधी जानकारी उस अद्यतन की है। आगामी तिथि के लिए ऊपर का उत्तर और नीचे की तिथि-सूची देखें।

एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जो हर चंद्र मास के दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि को — यानी वर्ष में लगभग 24 बार — रखा जाता है; इसकी मूल कथा के अनुसार देवी एकादशी भगवान विष्णु की शक्ति से प्रकट हुईं और मुर दैत्य का वध किया।

व्रत की तिथियाँ

ये संग्रहित पर्व-तिथियाँ हैं। स्थानीय समय और अलग परंपराओं में अंतर संभव है; नीचे हर तिथि के संदर्भ देखें।

तिथि (तारीख) पर्व / तिथि
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 आगामी
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

पापांकुशा एकादशी — आश्विन शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 5 नवंबर 2026
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

रमा एकादशी — कार्तिक कृष्ण एकादशी
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी — कार्तिक शुक्ल एकादशी
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

उत्पन्ना एकादशी — मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
रविवार, 20 दिसंबर 2026
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

मोक्षदा एकादशी — मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
रविवार, 3 जनवरी 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

सफला एकादशी — पौष कृष्ण एकादशी
सोमवार, 18 जनवरी 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

पौष पुत्रदा एकादशी — पौष शुक्ल एकादशी
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

षटतिला एकादशी — माघ कृष्ण एकादशी
बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

जया एकादशी — माघ शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 4 मार्च 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

विजया एकादशी — फाल्गुन कृष्ण एकादशी
गुरुवार, 18 मार्च 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

आमलकी एकादशी — फाल्गुन शुक्ल एकादशी
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

पापमोचनी एकादशी — चैत्र कृष्ण एकादशी
शनिवार, 17 अप्रैल 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

कामदा एकादशी — चैत्र शुक्ल एकादशी
रविवार, 2 मई 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

वरूथिनी एकादशी — वैशाख कृष्ण एकादशी
रविवार, 16 मई 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

मोहिनी एकादशी — वैशाख शुक्ल एकादशी
मंगलवार, 1 जून 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

अपरा एकादशी — ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
सोमवार, 14 जून 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

निर्जला एकादशी — ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
बुधवार, 30 जून 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

योगिनी एकादशी — आषाढ़ कृष्ण एकादशी
बुधवार, 14 जुलाई 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

देवशयनी एकादशी — आषाढ़ शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 29 जुलाई 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

कामिका एकादशी — श्रावण कृष्ण एकादशी
गुरुवार, 12 अगस्त 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

श्रावण पुत्रदा एकादशी — श्रावण शुक्ल एकादशी
शनिवार, 28 अगस्त 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

अजा एकादशी — भाद्रपद कृष्ण एकादशी
शनिवार, 11 सितंबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

परिवर्तिनी (पार्श्व) एकादशी — भाद्रपद शुक्ल एकादशी
रविवार, 26 सितंबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

इन्दिरा एकादशी — आश्विन कृष्ण एकादशी
सोमवार, 11 अक्टूबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

पापांकुशा एकादशी — आश्विन शुक्ल एकादशी
सोमवार, 25 अक्टूबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

रमा एकादशी — कार्तिक कृष्ण एकादशी
बुधवार, 10 नवंबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी — कार्तिक शुक्ल एकादशी
बुधवार, 24 नवंबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

उत्पन्ना एकादशी — मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
गुरुवार, 9 दिसंबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

मोक्षदा एकादशी — मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 23 दिसंबर 2027
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

सफला एकादशी — पौष कृष्ण एकादशी
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

सामान्य एकादशी सूची; स्मार्त और वैष्णव तिथियों में अंतर संभव

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

इन्दिरा एकादशी — आश्विन कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत कथा

पौराणिक परंपरा में (प्रायः भविष्योत्तर पुराण का संदर्भ दिया जाता है) यह कथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई गई बताई जाती है। सत्ययुग में मुर नाम का एक भयंकर दैत्य था। उसने अपने बल से इंद्र सहित सभी देवताओं को पराजित कर स्वर्ग से निकाल दिया। दुखी देवता भगवान शिव के पास पहुँचे, तो शिवजी ने उन्हें जगत के पालनहार भगवान विष्णु की शरण में जाने को कहा।

देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु मुर की राजधानी चंद्रावती पहुँचे। उन्होंने सुदर्शन चक्र और गदा से दैत्य की विशाल सेना का संहार कर दिया, पर मुर स्वयं परास्त नहीं हुआ। तब दोनों में मल्ल-युद्ध छिड़ गया, जो परंपरा के अनुसार हज़ारों दिव्य वर्षों तक चलता रहा।

लंबे युद्ध के बाद भगवान विष्णु विश्राम के लिए बदरिकाश्रम की हेमवती नामक गुफा में चले गए और वहाँ योगनिद्रा में लीन हो गए। मुर उनका पीछा करता हुआ गुफा तक आ पहुँचा और सोते हुए भगवान पर प्रहार करने को उद्यत हुआ।

उसी क्षण भगवान विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी, दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित कन्या प्रकट हुई। उसने मुर को युद्ध के लिए ललकारा और भीषण संग्राम में उसका वध कर दिया। जब भगवान की निद्रा टूटी और उन्होंने मृत दैत्य को देखा, तो आश्चर्य से पूछा कि यह किसने किया। कन्या ने विनम्रता से बताया कि वह उन्हीं की शक्ति से उत्पन्न हुई है और उसी ने दैत्य का अंत किया है।

प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उससे वर माँगने को कहा। कन्या ने वर माँगा कि जो मनुष्य उसके दिन उपवास करे, उसके पाप नष्ट हों और उसे धर्म, धन और मोक्ष की प्राप्ति हो। भगवान ने कहा कि तुम्हारा जन्म एकादशी तिथि को हुआ है, इसलिए तुम "एकादशी" नाम से पूजी जाओगी; जो तुम्हारा व्रत करेगा, वह मुझे सबसे प्रिय होगा और अंत में मेरे धाम को प्राप्त करेगा।

जिस दिन देवी एकादशी प्रकट हुईं वह मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी थी, इसलिए उस तिथि को "उत्पन्ना एकादशी" कहा जाता है और परंपरा में एकादशी व्रत का आरंभ इसी दिन से करना श्रेष्ठ माना जाता है। आगे चलकर वर्ष की हर एकादशी — जैसे देवशयनी, देवउठनी, निर्जला, मोक्षदा — का अपना नाम और अपनी अलग कथा बनी, पर सबका मूल यही कथा है कि एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है।

व्रत एवं पूजा विधि

1. दशमी (एक दिन पहले) को सूर्यास्त से पहले एक बार सात्विक भोजन करें। अन्न, विशेषकर चावल, और तामसिक भोजन से बचें तथा ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें।

2. एकादशी को प्रातः स्नान कर पीले या स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के सम्मुख व्रत का संकल्प लें — निर्जल, केवल जल, फलाहार या एक समय फलाहार, जैसी आपकी क्षमता हो।

3. भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का पूजन करें — पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप-दीप और फल अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य रखें, पर ध्यान रखें कि एकादशी को तुलसी तोड़ी नहीं जाती; पत्ते एक दिन पहले तोड़ लें।

4. "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और उस एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में "ॐ जय जगदीश हरे" आरती करें।

5. पूरे दिन अन्न — चावल, गेहूँ, दालें — नहीं लिया जाता। फलाहार करने वाले फल, दूध, मेवे, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक ले सकते हैं। संभव हो तो रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ जागरण करें।

6. द्वादशी को सूर्योदय के बाद, पंचांग में दिए गए पारण-समय के भीतर, ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें (पारण)। हरि-वासर के समय पारण नहीं किया जाता, और द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण कर लेना चाहिए।

सामान्य प्रश्न

एकादशी साल में कितनी बार आती है?
हर चंद्र मास में दो एकादशी आती हैं — कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की — इसलिए सामान्यतः वर्ष में 24 एकादशी होती हैं। जिस वर्ष अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) पड़ता है, उसमें 26 एकादशी होती हैं; 2026 में अधिक ज्येष्ठ के कारण पद्मिनी और परमा एकादशी अतिरिक्त थीं। हर एकादशी का अपना नाम और अपनी कथा है।
एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाए जाते?
शास्त्रीय परंपरा में एकादशी को सभी अन्न — विशेषकर चावल — वर्जित माने गए हैं, क्योंकि यह दिन इंद्रियों के संयम और भगवान के स्मरण के लिए है। लोक-मान्यता में चावल को इस दिन विशेष रूप से अशुद्ध बताया गया है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी प्रायः इस दिन चावल से परहेज़ करते हैं।
एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें?
पारण अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के बाद, पंचांग में बताए गए पारण-समय के भीतर किया जाता है — हरि-वासर समाप्त होने के बाद और द्वादशी तिथि खत्म होने से पहले। परंपरा में पहले किसी ज़रूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन-दान देकर, तुलसी-जल लेकर व्रत खोला जाता है। पारण का सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है।
कभी-कभी एकादशी दो दिन क्यों दिखाई जाती है?
जब तिथि सूर्योदय के हिसाब से दो दिनों पर पड़ती है, तब स्मार्त (गृहस्थ) परंपरा पहले दिन और वैष्णव/इस्कॉन परंपरा प्रायः अगले दिन व्रत रखती है। इस पृष्ठ पर नई दिल्ली के द्रिकपंचांग कैलेंडर की सामान्य एकादशी सूची दी गई है; यह हर स्मार्त, गौण, वैष्णव या इस्कॉन विकल्प और पारण-समय की पूरी सूची नहीं है। अलग पंचांगों में तिथियाँ भिन्न हो सकती हैं; अपने परिवार या संप्रदाय के लिए स्थानीय पंचांग में व्रत की तिथि और पारण-समय की पुष्टि करें।
क्या बीमार, बुज़ुर्ग या गर्भवती महिलाएँ एकादशी व्रत रख सकती हैं?
परंपरा स्वयं बालकों, वृद्धों और रोगियों को कठोर नियमों से छूट देती है। ऐसे लोग फलाहार या केवल अन्न-त्याग करके, या भगवान का नाम-स्मरण और कथा-श्रवण करके भी एकादशी मना सकते हैं। किसी स्वास्थ्य स्थिति में उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।