हनुमान जयंती

हनुमान जन्मोत्सव — चैत्र पूर्णिमा पर बजरंगबली का प्राकट्य-पर्व

हनुमान जयंती की अगली संग्रहित तिथि मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 है। नीचे स्थान, परंपरा और स्रोत देखें; स्थानीय समय की पुष्टि करें।

संपादकीय परिचय — अद्यतन: 10 अक्टूबर 2026

इस परिचय में दी गई वर्ष-संबंधी जानकारी उस अद्यतन की है। आगामी तिथि के लिए ऊपर का उत्तर और नीचे की तिथि-सूची देखें।

हनुमान जयंती 2027 मंगलवार, 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर मनाई जाएगी; 2026 में यह गुरुवार, 2 अप्रैल को थी। यह पवनपुत्र हनुमान के जन्म का पर्व है, जिसमें भक्त व्रत, हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ और सिंदूर-चोला अर्पण करते हैं।

हनुमान जयंती कब है? — तिथियाँ

ये संग्रहित पर्व-तिथियाँ हैं। स्थानीय समय और अलग परंपराओं में अंतर संभव है; नीचे हर तिथि के संदर्भ देखें।

तिथि (तारीख) पर्व / तिथि
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 आगामी
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

उद्धृत कैलेंडर की पर्व-तिथि; स्थानीय परंपरा देखें

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

चैत्र पूर्णिमा
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026
स्थान एवं स्रोत

नई दिल्ली, भारत

उद्धृत कैलेंडर की पर्व-तिथि; स्थानीय परंपरा देखें

स्रोत से मिलान: 2026-10-10

चैत्र पूर्णिमा

हनुमान जयंती क्यों मनाया जाता है?

हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्म का उत्सव है। परंपरा के अनुसार वे वानरराज केसरी और माता अंजना के पुत्र हैं और पवनदेव की कृपा से उत्पन्न हुए, इसलिए उन्हें पवनपुत्र और आंजनेय कहा जाता है। अनेक परंपराएँ उन्हें भगवान शिव का अंशावतार (रुद्रावतार) भी मानती हैं।

लोककथा के अनुसार बालक हनुमान ने उगते सूर्य को पका हुआ फल समझकर उसकी ओर छलाँग लगाई थी; इन्द्र के वज्र-प्रहार से उनकी ठुड्डी (हनु) पर चोट लगी, जिससे उनका नाम "हनुमान" पड़ा, और बाद में देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान दिए। रामायण में वे श्रीराम के अनन्य सेवक के रूप में सीता की खोज, लंका-दहन और संजीवनी लाने के लिए पूजित हैं।

हनुमान को चिरंजीवी माना जाता है — यह मान्यता है कि वे आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं और जहाँ रामकथा होती है वहाँ उपस्थित रहते हैं। इसी कारण अनेक भक्त इस पर्व को "जयंती" के स्थान पर "हनुमान जन्मोत्सव" कहना अधिक उचित मानते हैं।

यह पर्व बल, साहस, ब्रह्मचर्य, विनम्रता और निःस्वार्थ भक्ति के आदर्श का स्मरण कराता है। भक्त मानते हैं कि इस दिन हनुमान जी की उपासना से भय और संकट दूर होते हैं।

पूजा विधि

1. प्रातः स्नान और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ (संभव हो तो लाल या केसरिया) वस्त्र पहनें और व्रत या पूजा का संकल्प लें। परंपरा में हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय माना जाता है, इसलिए अनेक मंदिरों में भोर से ही उत्सव आरंभ होता है।

2. स्थापना: चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें; साथ में श्रीराम-सीता का चित्र रखना शुभ माना जाता है, क्योंकि हनुमान जी की पूजा रामभक्ति से अलग नहीं है।

3. चोला और अर्पण: सामर्थ्य हो तो चमेली के तेल में मिले सिंदूर का चोला चढ़ाएँ (अनेक परिवारों में यह कार्य पुरुष करते हैं — अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें)। लाल पुष्प, जनेऊ, अक्षत, धूप-दीप अर्पित करें।

4. भोग: बूंदी या बेसन के लड्डू, गुड़-चना, केला और तुलसी-दल सहित भोग लगाएँ।

5. पाठ: हनुमान चालीसा (प्रायः 7, 11 या 108 बार), बजरंग बाण, संकटमोचन हनुमान अष्टक और सुंदरकांड का पाठ करें; "ॐ हं हनुमते नमः" का जप भी किया जाता है।

6. आरती और प्रसाद: हनुमान जी की आरती ("आरती कीजै हनुमान लला की") कर प्रसाद बाँटें। व्रत रखने वाले अगले दिन या संध्या पूजा के बाद पारण करते हैं; स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में चिकित्सक से परामर्श लें।

परंपराएँ एवं अनुष्ठान

  • भोर में मंदिरों में जन्मोत्सव, विशेष श्रृंगार और सिंदूर-चोला अर्पण।
  • हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ — अनेक स्थानों पर 108 बार — और अखंड सुंदरकांड पाठ।
  • बूंदी, बेसन के लड्डू और गुड़-चने का भोग तथा भंडारे में प्रसाद वितरण।
  • उत्तर भारत के अनेक नगरों में शोभा-यात्राएँ, जिनमें हनुमान जी की झाँकियाँ और ध्वज निकाले जाते हैं।
  • व्रत, दान (विशेषकर अन्न और वस्त्र) और श्रीराम नाम का जप।

सामान्य प्रश्न

हनुमान जयंती 2027 कब है?
उत्तर भारत में हनुमान जयंती 2027 मंगलवार, 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर है। द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) के अनुसार पूर्णिमा तिथि 20 अप्रैल को प्रातः लगभग 4:51 बजे आरंभ होकर 21 अप्रैल को लगभग 3:56 बजे समाप्त होगी।
हनुमान जयंती 2026 कब थी?
हनुमान जयंती 2026 गुरुवार, 2 अप्रैल को मनाई गई। पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को प्रातः लगभग 7:06 बजे आरंभ होकर 2 अप्रैल को लगभग 7:41 बजे समाप्त हुई; सूर्योदय के समय तिथि मानने के नियम (उदया तिथि) के अनुसार पर्व 2 अप्रैल को था।
अलग-अलग क्षेत्रों में हनुमान जयंती अलग तिथियों पर क्यों मनाई जाती है?
उत्तर भारत में यह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में चैत्र पूर्णिमा से आरंभ 41 दिन की दीक्षा वैशाख कृष्ण दशमी को हनुमान जयंती पर पूर्ण होती है; तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या को हनुमथ जयंती और कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को हनुमान व्रत मनाया जाता है। अयोध्या के हनुमानगढ़ी सहित कुछ परंपराएँ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (दिवाली से एक दिन पहले) को हनुमान जन्मोत्सव मानती हैं। ये सभी परंपराएँ अपने-अपने स्थान पर मान्य हैं।
इसे हनुमान "जयंती" कहें या "जन्मोत्सव"?
दोनों नाम प्रचलित हैं। कई भक्त और संत "जन्मोत्सव" कहना पसंद करते हैं, क्योंकि हनुमान जी चिरंजीवी माने जाते हैं और "जयंती" शब्द का प्रयोग प्रायः उन महापुरुषों के लिए होता है जो देह त्याग चुके हैं। पर्व की पूजा-विधि दोनों नामों में एक ही है।
हनुमान जयंती पर कौन-से पाठ करने चाहिए?
सबसे प्रचलित पाठ हनुमान चालीसा है, जिसे अनेक भक्त 11 या 108 बार पढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त बजरंग बाण, संकटमोचन हनुमान अष्टक, सुंदरकांड और हनुमान जी की आरती का पाठ भी परंपरागत रूप से किया जाता है।
क्या महिलाएँ हनुमान जयंती पर पूजा कर सकती हैं?
हाँ। महिलाएँ व्रत रख सकती हैं, हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं और भोग-आरती कर सकती हैं। कुछ परिवारों और मंदिरों में यह परंपरा है कि प्रतिमा पर चोला चढ़ाने जैसे कार्य पुरुष करते हैं; ऐसे में अपनी पारिवारिक या मंदिर की परंपरा का पालन करें।