-
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
Jai Gaṇesha Girijā suvana, mangala karaṇa kṛpāla | Dīnana ke dukha dūra kari, kījai nātha nihāla ||
हे गिरिजा के पुत्र, मंगल करने वाले कृपालु गणेश, आपकी जय हो; हे नाथ, दीनों के दुःख दूर कर उन्हें निहाल कीजिए।
-
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
Jai jai Shrī Shanideva prabhu, sunahu vinaya mahārāja | Karahu kṛpā he Ravi tanaya, rākhahu jana kī lāja ||
हे प्रभु श्री शनिदेव, आपकी जय हो; हे महाराज, मेरी विनती सुनिए। हे सूर्यपुत्र, कृपा कीजिए और अपने भक्त की लाज रखिए।
-
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
Jayati jayati Shanideva dayālā | Karata sadā bhaktana pratipālā ||
हे दयालु शनिदेव, आपकी जय हो, जय हो; आप सदा अपने भक्तों का पालन और रक्षा करते हैं।
-
चारि भुजा तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
Chāri bhujā tanu shyāma virājai | Māthe ratana mukuṭa chhabi chhājai ||
आपकी चार भुजाएँ हैं और श्याम वर्ण का शरीर शोभित है; माथे पर रत्नों का मुकुट अपनी छटा बिखेरता है।
-
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
Parama vishāla manohara bhālā | Ṭeṛhī dṛṣhṭi bhṛkuṭi vikarālā ||
आपका ललाट अत्यंत विशाल और मनोहर है; आपकी दृष्टि तिरछी और भौंहें भयंकर हैं।
-
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥
Kuṇḍala shravaṇa chamāchama chamake | Hiya māla muktana maṇi damake ||
कानों में कुंडल चमाचम चमकते हैं और हृदय पर मोतियों और मणियों की माला दमकती है।
-
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
Kara meṁ gadā trishūla kuṭhārā | Pala bicha karaiṁ arihiṁ sanhārā ||
आपके हाथों में गदा, त्रिशूल और फरसा हैं, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार कर देते हैं।
-
पिंगल कृष्णो छाया नन्दन। यम कोणस्थ रौद्र दुखभंजन॥
Pingala Kṛṣhṇo Chhāyā nandana | Yama Koṇastha Raudra dukhabhanjana ||
पिंगल, कृष्ण, छायानंदन, यम, कोणस्थ, रौद्र और दुःखभंजन, ये आपके नाम हैं।
-
सौरी मन्द शनी दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
Saurī Manda Shanī dasha nāmā | Bhānu putra pūjahiṁ saba kāmā ||
सौरि, मंद और शनि मिलाकर ये आपके दस नाम हैं; सूर्यपुत्र की पूजा करने से सब कामनाएँ पूरी होती हैं, ऐसी मान्यता है।
-
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
Jā para prabhu prasanna hvaiṁ jāhīṁ | Rankahuṁ rāva karaiṁ kṣhaṇa māhīṁ ||
प्रभु जिस पर प्रसन्न हो जाते हैं, उस रंक को भी क्षण भर में राजा बना देते हैं।
-
पर्वतहू तृण होइ निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
Parvatahū tṛṇa hoi nihārata | Tṛṇahū ko parvata kari ḍārata ||
आपकी दृष्टि पड़ते ही पर्वत भी तिनका बन जाता है, और आप तिनके को भी पर्वत बना देते हैं।
-
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
Rāja milata bana Rāmahiṁ dīnhayo | Kaikeihuṁ kī mati hari līnhayo ||
जब राम को राज्य मिलने वाला था, तब आपके प्रभाव से उन्हें वनवास मिला और कैकेयी की बुद्धि भी फिर गई।
-
बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
Banahūṁ meṁ mṛga kapaṭa dikhāī | Mātu Jānakī gaī churāī ||
वन में भी कपट का मृग दिखाई दिया और माता जानकी का हरण हो गया।
-
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥
Lakhanahiṁ shakti vikala kariḍārā | Machigā dala meṁ hāhākārā ||
शक्ति-बाण ने लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया और राम की सेना में हाहाकार मच गया।
-
रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
Rāvaṇa kī gati-mati baurāī | Rāmachandra soṁ baira baṛhāī ||
रावण की चाल और बुद्धि भ्रमित हो गई, और उसने रामचंद्र से वैर बढ़ा लिया।
-
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
Diyo kīṭa kari kanchana Lankā | Baji Bajaranga bīra kī ḍankā ||
सोने की लंका कीड़े के समान तुच्छ कर दी गई और वीर बजरंगबली की विजय का डंका बज उठा।
-
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
Nṛpa Vikrama para tuhi pagu dhārā | Chitra mayūra nigali gai hārā ||
जब आपने राजा विक्रमादित्य पर पग रखा, तो चित्र में बना मोर हार निगल गया।
-
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥
Hāra naulakhā lāgyo chorī | Hātha paira ḍaravāyo torī ||
नौलखे हार की चोरी का आरोप उन पर लगा और उनके हाथ-पैर तुड़वा दिए गए।
-
भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
Bhārī dashā nikṛṣhṭa dikhāyo | Telihiṁ ghara kolhū chalavāyo ||
आपने उन्हें बहुत कठिन और हीन दशा दिखाई, यहाँ तक कि तेली के घर कोल्हू चलवाया।
-
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
Vinaya rāga Dīpaka mahaṁ kīnhayoṁ | Taba prasanna prabhu hvai sukha dīnhayoṁ ||
जब उन्होंने दीपक राग में आपकी विनती की, तब आप प्रसन्न हुए और उन्हें फिर से सुख दिया।
-
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरें डोम घर पानी॥
Harishchandra nṛpa nāri bikānī | Āpahuṁ bhareṁ Ḍoma ghara pānī ||
राजा हरिश्चंद्र की पत्नी बिक गई और स्वयं उन्हें डोम के घर पानी भरना पड़ा।
-
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
Taise Nala para dashā sirānī | Bhūñjī-mīna kūda gaī pānī ||
वैसे ही राजा नल पर कठिन दशा आई, यहाँ तक कि भुनी हुई मछली भी उछलकर पानी में चली गई।
-
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
Shrī Shankarahiṁ gahyo jaba jāī | Pāravatī ko satī karāī ||
जब आपका प्रभाव भगवान शंकर पर पड़ा, तब पार्वती (पूर्वजन्म में सती) को सती होना पड़ा।
-
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
Tanika vilokata hī kari rīsā | Nabha uṛi gayo Gaurisuta sīsā ||
रोष में आपके तनिक देखते ही गौरी-पुत्र गणेश का सिर आकाश में उड़ गया।
-
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
Pāṇḍava para bhai dashā tumhārī | Bachī Draupadī hoti ughārī ||
पांडवों पर आपकी दशा आई, तो द्रौपदी निर्वस्त्र होते-होते बची।
-
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥
Kaurava ke bhī gati mati mārayo | Yuddha Mahābhārata kari ḍārayo ||
आपने कौरवों की भी चाल और बुद्धि हर ली, जिससे महाभारत का युद्ध हो गया।
-
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
Ravi kahaṁ mukha mahaṁ dhari tatkālā | Lekara kūdi parayo pātālā ||
आपने तत्काल सूर्य को मुख में धर लिया और उन्हें लेकर पाताल में कूद पड़े।
-
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
Sheṣha deva-lakhi vinatī lāī | Ravi ko mukha te diyo chhuṛāī ||
यह देखकर देवताओं ने विनती की, तब आपने सूर्य को अपने मुख से छोड़ दिया।
-
वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
Vāhana prabhu ke sāta sujānā | Jaga diggaja gardabha mṛga svānā ||
प्रभु के सात प्रसिद्ध वाहन हैं, जिनमें दिग्गज हाथी, गधा, हिरण और कुत्ता शामिल हैं।
-
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
Jambuka sinha ādi nakha dhārī | So phala jyotiṣha kahata pukārī ||
सियार, सिंह आदि नख वाले पशु भी उनके वाहन हैं; ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक वाहन का फल अलग बताता है।
-
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं॥
Gaja vāhana Lakṣhmī gṛha āvaiṁ | Haya te sukha sampatti upajāvaiṁ ||
परंपरा के अनुसार हाथी पर आगमन से घर में लक्ष्मी आती हैं और घोड़े पर आगमन सुख-संपत्ति लाता है।
-
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
Gardabha hāni karai bahu kājā | Sinha siddhakara rāja samājā ||
गधे पर आगमन अनेक कार्यों में हानि करता है, जबकि सिंह पर आगमन राज-समाज में सफलता दिलाता है, ऐसा कहा गया है।
-
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
Jambuka buddhi naṣhṭa kara ḍārai | Mṛga de kaṣhṭa prāṇa sanhārai ||
सियार पर आगमन बुद्धि को भ्रमित करता है और हिरण पर आगमन कष्ट देने वाला बताया गया है।
-
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥
Jaba āvahiṁ prabhu svāna savārī | Chorī ādi hoya ḍara bhārī ||
जब प्रभु कुत्ते की सवारी पर आते हैं, तब चोरी आदि का बड़ा भय बताया गया है।
-
तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
Taisahi chāri charaṇa yaha nāmā | Svarṇa lauha chāṁdī aru tāmā ||
इसी प्रकार शनि के चार चरण (पाये) बताए गए हैं, जिनके नाम सोना, लोहा, चाँदी और ताँबा हैं।
-
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
Lauha charaṇa para jaba prabhu āvaiṁ | Dhana jana sampatti naṣhṭa karāvaiṁ ||
कहा गया है कि जब प्रभु लोहे के पाये पर आते हैं, तब धन, जन और संपत्ति की हानि होती है।
-
समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी॥
Samatā tāmra rajata shubhakārī | Svarṇa sarva sukha mangala bhārī ||
ताँबे का पाया समता देने वाला और चाँदी का पाया शुभ माना गया है, जबकि सोने का पाया हर प्रकार का सुख और मंगल देता है।
-
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
Jo yaha Shani charitra nita gāvai | Kabahuṁ na dashā nikṛṣhṭa satāvai ||
जो प्रतिदिन शनि के इस चरित्र का गान करता है, उसे कठिन दशा कभी नहीं सताती, ऐसा कवि कहते हैं।
-
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
Adbhuta nātha dikhāvaiṁ līlā | Karaiṁ shatru ke nashi bali ḍhīlā ||
नाथ अपनी अद्भुत लीला दिखाते हैं और शत्रु के बल को नष्ट कर उसे ढीला कर देते हैं।
-
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
Jo paṇḍita suyogya bulavāī | Vidhivata Shani graha shānti karāī ||
जो कोई योग्य पंडित को बुलाकर विधिपूर्वक शनि ग्रह की शांति कराता है,
-
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
Pīpala jala Shani divasa chaṛhāvata | Dīpa dāna dai bahu sukha pāvata ||
और शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाकर दीपदान करता है, वह बहुत सुख पाता है, ऐसा चालीसा कहती है।
-
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥
Kahata Rāma Sundara prabhu dāsā | Shani sumirata sukha hota prakāshā ||
प्रभु के दास रामसुन्दर कहते हैं कि शनि का स्मरण करने से सुख का प्रकाश होता है।
-
पाठ शनिश्चर देव को, कीन्हों 'विमल' तैयार। करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥
Pāṭha Shanishchara deva ko, kīnhoṁ 'Vimala' taiyāra | Karata pāṭha chālīsa dina, ho bhavasāgara pāra ||
शनिश्चर देव का यह पाठ "विमल" ने तैयार किया है; चालीस दिन तक इसका पाठ करने वाला भवसागर से पार हो जाता है, ऐसी मान्यता है।