चालीसा
चालीसा सामान्यतः चालीस चौपाइयों का भक्ति पाठ है। आरंभ और अंत के दोहे भी पाठ का हिस्सा हो सकते हैं। यहाँ हनुमान, शिव, दुर्गा, गणेश और शनि चालीसा उपलब्ध हैं।
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माँ दुर्गा
- दुर्गा चालीसा
दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा की स्तुति में रची गई चालीस चौपाइयों की हिंदी भक्ति-रचना है, जो "नमो नमो दुर्गे सुख करनी" से आरंभ होती है और विशेषकर नवरात्रि में देवी की कृपा व रक्षा के लिए पढ़ी जाती है।
गणेश
- गणेश चालीसा
गणेश चालीसा भगवान गणेश की हिंदी स्तुति है, जो "जय गणपति सदगुण सदन" दोहे से आरंभ होकर उनके रूप, जन्म-कथा और बुद्धि की महिमा गाती है; इसे परंपरागत रूप से बुधवार, चतुर्थी और किसी शुभ कार्य के आरंभ में पढ़ा जाता है।
हनुमान
- हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी में रचित भगवान हनुमान की स्तुति है, जिसमें दो आरंभिक दोहे, ४० चौपाइयाँ और एक समापन दोहा हैं; भक्त इसे साहस, रक्षा और संकट-निवारण की भावना से पढ़ते हैं।
शनि देव
- शनि चालीसा
शनि चालीसा न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव की हिंदी स्तुति है, जो "जयति जयति शनिदेव दयाला" से आरंभ होकर उनके रूप, दस नामों और प्रभाव की कथाएँ गाती है; इसे परंपरागत रूप से शनिवार को और साढ़ेसाती या शनि-दशा में पढ़ा जाता है।
शिव
- शिव चालीसा
शिव चालीसा भगवान शिव की स्तुति में अवधी-हिंदी की चालीस चौपाइयों का भक्ति-काव्य है, जिसकी रचना अयोध्यादास ने की; इसका पाठ विशेषकर सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर किया जाता है।